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पीएम मोदी के सपने के अनुरूप संवरने लगी है केदारपुरी

वर्ष 2013 में जलप्रलय का दंश झेल चुकी केदारपुरी अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने के अनुरूप नए कलेवर में संवर रही है। साढ़े ग्यारह हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ में मंदिर के आगे लंबा- चौड़ा आंगन न सिर्फ सुकून देता है, बल्कि श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र भी है। इस आंगन में पहुंचते ही मंदिर की भव्यता के दर्शन होते हैं तो ठीक पीछे हिमाच्छादित पहाडिय़ां और बर्फीली बयार सारी थकान दूर कर देती है। इतना ही नहीं, पांच सौ मीटर दूर से ही मंदिर के नजर आने पर पूरा माहौल भगवान शिव के जयकारों से गूंज उठता है।

केदारनाथ का पुनर्निर्माण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार है। वह खुद तीन बार ड्रोन के माध्यम से पुनर्निर्माण कार्यों की समीक्षा कर चुके हैं और प्रधानमंत्री कार्यालय लगातार इसका अपडेट ले रहा है। इस सबको देखते हुए प्रदेश सरकार भी पुनर्निर्माण कार्यों को गंभीरता से ले रही है।

कोशिश ये है कि केदारपुरी को उसकी भव्यता के अनुरूप संवारा जाए। पुनर्निर्माण कार्यों में यह परिलक्षित भी होने लगी है। मंदाकिनी और सरस्वती के संगम पर घाट का निर्माण कराया गया है, जहां दर्शन से पहले तमाम श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाते हैं। मंदिर के ठीक पीछे सुरक्षा दीवार का निर्माण कराने के साथ ही निगरानी के लिए वॉच टावर भी लगाए गए हैं।

साथ ही मंदिर के ठीक पीछे जमा मलबे के समतलीकरण की भी योजना पर काम चल रहा है। श्रद्धालुओं के लिए प्रीफैब्रिकेटेड हट, डोरमैट्री, धर्मशालाएं, टेंट आदि में ठहरने की ठीकठाक व्यवस्थाएं दिख रही हैं।

जहां तक गौरीकुंड से केदारनाथ तक के पैदल ट्रैक की बात है तो आपदा के बाद नया बना यह ट्रैक लंबा जरूर हुआ है, लेकिन सुगम है। हालांकि, छोटी लिनचोली से लेकर बड़ी लिनचोली तक दो किमी की चढ़ाई अधिक है, लेकिन आने वाले दिनों में इसमें सुधार किया जा सकता है।

पहली बार बाबा केदार के दर्शनों को गुजरात के सूरत से आई 55 वर्षीय कांता बेन कहती हैं कि मंदिर के आंगन में पहुंचते ही सुकून मिलता है। ठहरने, खाने आदि की कोई दिक्कत नहीं हुई। व्यवस्थाएं ठीक हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि पूरे पैदल ट्रैक पर शेड की व्यवस्था भी हो जाए तो सोने में सुहागा।

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